धान बेचने, स्लाट बुक करने से किसान कर रहे परहेज
 बालाघाट।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 1 दिसंबर से सरकार द्वारा धान की खरीदी की जा रही है, लेकिन किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए फिलहाल अपनी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जिसकी वजह विधानसभा चुनाव के पूर्व समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर की गई घोषणा भी बताई जा रही है। दरअसल चुनाव के पूर्व भाजपा सरकार ने अपने घोषणा पत्र में किसानों से 3100 रु प्रति क्विंटल के हिसाब से उपार्जन खरीदने का वादा किया था। अब किसानों को इस बात का डर सता रहा है कि यदि वर्तमान समय में वह अपना उपार्जन बेच देंगे, तो कहीं सरकार उन्हें पुराने हिसाब से ही भुगतान ना कर दे। इसीलिए किसान अपना उपार्जन बेचने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और धान को बेचने खरीदी केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। आपको बताएं कि विधानसभा चुनाव के पूर्व किसानों को साधने और उनके वोट हासिल कर अपनी सरकार बनाने के लिए भाजपा सरकार ने किसानों की धान 3100 रु प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदने की घोषणा की थी। पिछले वर्ष इसी सरकार ने किसानों की धान 21.83 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी थी। सरकार बनने के बाद सरकार की तरफ से समर्थन मूल्य को लेकर कोई बयान नहीं आया है। वही मंत्रिमंडल का भी विस्तार नही हुआ है। अब किसान इस कशमकश में है कि कही विधानसभा चुनाव के पूर्व की गई यह घोषणा अन्य घोषणाओं की तरह सिर्फ घोषणा न बनकर रह जाए, या फिर 3100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से धान खरीदने की यह घोषणा कहीं जुमला साबित ना हो जाए। इसीलिए किसान खरीदी केन्द्रों से दूरी बनाए हुए हैं, ज्यादातर किसान शपथ ग्रहण की राह देख रहे हैं।
चुनाव परिणाम के बाद कुछ किसानों ने कराया स्लॉट बुक
समर्थन मूल्य पर अपना उपार्जन बचने के लिए किसान सरकार बनने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि पहले सरकार बन जाए जीते हुए विधायकों को मंत्री पद मिल जाए उसके बाद में समर्थन मूल्य पर अपना उपार्जन बेचेंगे, ताकि वादों के मुताबिक उन्हें सर्मथन मूल्य मिल सके। शायद यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने तक किसानों ने स्लॉट बुक नहीं किया था जहां चुनाव परिणाम आने और 9 दिन बाद मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होने के बाद अब किसान स्लॉट बुक करने केंद्र पहुंचने लगे हैं। लेकिन अभी भी किसानों को यही चिंता सता रही है कि सरकार उनकी धान 3100 प्रति क्विंटल खरीदेगी या नहीं। या फिर जल्द धान बेचने पर कही उन्हें पुराने रेट ही ना थमा दिया जाए। इसी कशमकश में किसानो ने धान खरीदी केंद्रों से अपनी दूरी बनाई हुई हैं ।
स्लॉट बुक करने में किसान भी नहीं दिखा रहे रुचि
बात अगर पंजीकृत किसानों की करें तो पिछले वर्ष जिले में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए 1लाख 14 हजार 805 किसानों ने अपना पंजीयन कराया था, जबकि इस वर्ष जिले में 1 लाख 17 हजार 596 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। जिनकी धान की खरीदी 1 दिसंबर से शुरू होनी थी लेकिन धान बेचने के लिए अब तक कुछ किसानों ने स्टॉल बुक कराया है जबकि ऐसे कई केंद्र है जहां अब तक किसी भी गांव के किसानों ने पहुंचकर स्लाट बुकिंग का कार्य नहीं कराया है।
 हमें भरोसा नहीं है कि 3100 का रेट मिलेगा- झनकलाल
गोंगलई मंडी में स्लाट बुक करने आए ग्राम भटेरा  निवासी किसान झनकलाल ने बताया कि उनके पास 300 कट्टी धान है। वह स्लॉट बुक करने के लिए केंद्र आए हैं। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव के पूर्व सरकार द्वारा 3100 प्रति क्विंटल के हिसाब से धान खरीदने की घोषणा की गई थी। लेकिन हमें भरोसा नहीं है कि सरकार इतनी अधिक रेट में धान की खरीदी करेंगी। हमे यह भी पता नहीं की किस रेट में हमारा धान बिकेगा, हमे पैसो की जरूरत है इसीलिए धान बेचना पड़ रहा है।
कितने में धान खरीदेंगे यह लिखा भी नहीं है - ढालचन्द
भटेरा के एक अन्य किसान ढालचन्द ने बताया कि वह स्लॉट बुक करने के लिए आज गोंगलई केंद्र पर आए हैं। हमें यह जानकारी लगी है कि इस बार 3100 रु प्रति क्विंटल के हिसाब से सरकार समर्थन मूल्य पर धान खरीदने वाली है। लेकिन अब तक इसकी कोई सूचना केंद्र पर नहीं लिखी गई है। हमें तो मुश्किल लग रहा है कि सरकार घोषणा के अनुरूप समर्थन मूल्य पर धान खरीदें। फिर भी हमारी मांग है कि जो वादा किया था उसके मुताबिक धान खरीदना चाहिए, क्योंकि पिछले वर्ष 21.83 रुपए का रेट दिया गया था सीधे-सीधे 1000 रु प्रति क्विंटल का फर्क आएगा। सरकार ने नए रेट के हिसाब से धान लेना चाहिए।